है यही तम्माना की दिल की हर दास्तान आपके ज़ुबान पे आए!
लिख दूं कुच्छ ऐसा की काग़ज़ भी कुच्छ ऐसे शरमाये!
शब्द मेरे हो पर लाबो से आपके मुस्कुराहट छलक जाए!
शब्दो के ऐसे तीर चले की उनका चंदन हुस्न याद अजाए!
है यही तम्माना की दिल की हर दस्ता आपके ज़ुबान पे आए!
मुस्कुराता मुखड़ा उनका पर्दे से चुपाता नज़र आए!
सोच के समुदर मे ऐसे हो की आँख से नींद तक उड़ जाए!
भरी काली रात मे वो चाँदनी सा चमचमाए!
वो पायल की आवाज़ जैसे फिर से च्चंच्छनाए!
चुपके से वो आवाज़ फिर से कानो मे गुनगुना जाए!
मस्ती का आलम हो, और आँखो मे अंशु डॅब्डबॉ जाए!
है यही तामाना की उनकी हर याद कुच्छ ऐसे आए!
भूल के सारी दुनिया को फिर से उनकी याद मे डूब जाए!
है यही तामाना की दिल की हर दस्ता आपके ज़ुबान पे आए!
वो काग़ज़ सा मुखड़ा और मुश्कान जैसे कलाम बन जाए!
जहा शब्दो के नीरीत्य मे आप कुच्छ ऐसे भाओक हो जाए!
जैसे की अब हर ज़र्रे मे वो और बस वो ही नज़र आए!
हर शब्द कुच्छ ऐसा हो जैसे उनका काज़ल सा लहराए!
और फिर पढ़ो ऐसे की बस हर सब्द मे उनका नाम आए!
जहाँ थरथराए होंठ ओर सुकून बस दिल को आए! _राज, राहुल
लिख दूं कुच्छ ऐसा की काग़ज़ भी कुच्छ ऐसे शरमाये!
शब्द मेरे हो पर लाबो से आपके मुस्कुराहट छलक जाए!
शब्दो के ऐसे तीर चले की उनका चंदन हुस्न याद अजाए!
है यही तम्माना की दिल की हर दस्ता आपके ज़ुबान पे आए!
मुस्कुराता मुखड़ा उनका पर्दे से चुपाता नज़र आए!
सोच के समुदर मे ऐसे हो की आँख से नींद तक उड़ जाए!
भरी काली रात मे वो चाँदनी सा चमचमाए!
वो पायल की आवाज़ जैसे फिर से च्चंच्छनाए!
चुपके से वो आवाज़ फिर से कानो मे गुनगुना जाए!
मस्ती का आलम हो, और आँखो मे अंशु डॅब्डबॉ जाए!
है यही तामाना की उनकी हर याद कुच्छ ऐसे आए!
भूल के सारी दुनिया को फिर से उनकी याद मे डूब जाए!
है यही तामाना की दिल की हर दस्ता आपके ज़ुबान पे आए!
वो काग़ज़ सा मुखड़ा और मुश्कान जैसे कलाम बन जाए!
जहा शब्दो के नीरीत्य मे आप कुच्छ ऐसे भाओक हो जाए!
जैसे की अब हर ज़र्रे मे वो और बस वो ही नज़र आए!
हर शब्द कुच्छ ऐसा हो जैसे उनका काज़ल सा लहराए!
और फिर पढ़ो ऐसे की बस हर सब्द मे उनका नाम आए!
जहाँ थरथराए होंठ ओर सुकून बस दिल को आए! _राज, राहुल

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